Thursday, 2 July 2020

मालती सवैया छंद


मस्तक मोर धरोहर माधव पीत पटी नटई लिपटाए।
प्रीतम नीप तले ऋतु गैयन संग शिखी अहि बाघ बिठाए।
भीति भरा मन भीतर बाहर केशव-केशव ध्यान लगाए।
देखि तपोवन कल्पित लोचन सौं तिहुँलोक सुधी चकराए।

- ©ऋतिका'ऋतु'

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